GST 2.0: टाइल्स और सैनेटरीवेयर इंडस्ट्री को मिलेगा बड़ा फायदा
22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले GST 2.0 ने भारत की सिरेमिक और सैनेटरीवेयर इंडस्ट्री में नई उम्मीदें जगा दी हैं। अब टैक्स स्लैब केवल 5%, 18% और 40% रह गए हैं। इस बदलाव का सीधा फायदा टाइल्स, बाथरूम फिटिंग्स और सैनेटरीवेयर सेक्टर को मिलेगा।
5% स्लैब – जरूरी और रोज़मर्रा के सामान
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कुछ बेसिक बिल्डिंग मटेरियल्स और लो-कॉस्ट सिरेमिक प्रोडक्ट्स को 5% GST में शामिल किया गया है।
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इससे लो बजट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और छोटे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
5% स्लैब – जरूरी और रोज़मर्रा के सामान
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कुछ बेसिक बिल्डिंग मटेरियल्स और लो-कॉस्ट सिरेमिक प्रोडक्ट्स को 5% GST में शामिल किया गया है।
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इससे लो बजट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और छोटे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
40% स्लैब – लग्ज़री प्रोडक्ट्स
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हाई-एंड लग्ज़री सिरेमिक और प्रीमियम इंपोर्टेड सैनेटरीवेयर इस स्लैब में आ सकते हैं।
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इससे आम ब्रांड्स पर असर नहीं होगा लेकिन महंगे इंटरनेशनल ब्रांड्स और लक्ज़री प्रोजेक्ट्स की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इंडस्ट्री को क्या फायदे होंगे?
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बिक्री बढ़ेगी – 28% से घटकर 18% GST होने से दाम कम होंगे और डिमांड बढ़ेगी।
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निर्यात (Export) को बढ़ावा – सिरेमिक टाइल्स और सैनेटरीवेयर भारत से विदेशों में ज्यादा बिकेंगे क्योंकि कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी।
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हाउसिंग सेक्टर को राहत – प्रधानमंत्री आवास योजना और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में टाइल्स-सैनेटरीवेयर की मांग तेजी से बढ़ेगी।
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छोटे व्यापारियों और डीलर्स को फायदा – कम GST दर से कस्टमर खरीदने में झिझकेंगे नहीं, जिससे मार्केट में कैश फ्लो बढ़ेगा।
GST 2.0 का सबसे बड़ा फायदा सिरेमिक टाइल्स और सैनेटरीवेयर इंडस्ट्री को मिलेगा।
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आम उपभोक्ता को सस्ते प्रोडक्ट्स,
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बिल्डर्स को बेहतर प्रोजेक्ट कॉस्ट,
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और निर्यातकों को ग्लोबल मार्केट में बढ़त मिलेगी।
भारत की मोरबी जैसी टाइल हब सिटी के लिए यह बदलाव नई ग्रोथ स्टोरी लिख सकता है।