ऑन-ग्रिड सोलर रूफटॉप: पावर कट के समय क्या होता है?
आजकल बहुत से लोग अपने घर की छत पर 3.3 kW से 5 kW तक के ऑन-ग्रिड सोलर रूफटॉप सिस्टम लगवा रहे हैं। यह सिस्टम बिजली का बिल कम करने और ग्रीन एनर्जी के लिए काफी लोकप्रिय है। लेकिन जब पावर कट होता है तो कई लोगों को लगता है – “सोलर पैनल पर धूप तो है, फिर भी बिजली नहीं मिल रही – यह तो नुकसान है!”
चलिए समझते हैं असली में क्या होता है और क्यों लोगों को यह “नुकसान” लगता है।
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम क्या है?
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम वह तकनीक है जो सीधे बिजली कंपनी के ग्रिड से कनेक्ट रहता है।
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सोलर पैनल धूप से बिजली बनाते हैं।
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इन्वर्टर इस बिजली को AC पावर में बदलकर घर और ग्रिड दोनों में सप्लाई करता है।
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अगर घर में खपत कम है तो अतिरिक्त यूनिट ग्रिड में भेज दी जाती है और बिजली कंपनी नेट-मीटरिंग के जरिए क्रेडिट देती है।
पावर कट के समय क्या होता है?
जैसे ही पावर कट होता है:
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इन्वर्टर ऑटोमैटिक बंद हो जाता है (इसे कहते हैं “एंटी-आइलैंडिंग प्रोटेक्शन”)।
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सोलर पैनल से पैदा हुई बिजली ग्रिड में नहीं जाती।
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यूनिट का प्रोडक्शन भी बंद हो जाता है।
नतीजा: पावर कट के समय आप सोलर की बिजली इस्तेमाल नहीं कर सकते और कोई यूनिट मीटर में नहीं गिनती।
लोगों को नुकसान क्यों लगता है?
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धूप होने के बावजूद यूनिट न बनना लोगों को लगता है कि “सोलर लगाकर भी बिजली नहीं मिली – पैसा बेकार गया।”
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असल में यह टेक्निकल सेफ्टी फीचर है। जब बिजली कंपनी लाइन रिपेयर करती है तो लाइन में करंट न जाए, इसके लिए इन्वर्टर को बंद करना जरूरी होता है।
इसका समाधान क्या है?
अगर आप पावर कट के समय भी सोलर बिजली चाहते हैं तो:
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हाइब्रिड सोलर सिस्टम लगाइए – जिसमें बैटरी बैकअप रहता है।
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सोलर से बनी यूनिट बैटरी में स्टोर होगी और बिजली जाते ही घर के जरूरी लोड को चला सकेगी।
उदाहरण
मान लीजिए आपके घर में 3.3 kW सोलर सिस्टम है:
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दिन में औसतन 13–15 यूनिट बिजली बनती है।
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अगर पावर कट 3 घंटे का है, तो इस समय 4–5 यूनिट बन सकती थी, पर ऑन-ग्रिड सिस्टम में ये यूनिट वेस्ट हो जाती हैं।
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हाइब्रिड बैटरी हो तो आप इन 4–5 यूनिट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अगर आप बिजली बंद होने पर भी सोलर का फायदा लेना चाहते हैं तो बैटरी बैकअप (हाइब्रिड सिस्टम) पर विचार करें।